Dr. Poonam Gupta became Deputy Governor of RBI | डॉ. पूनम गुप्ता RBI की डिप्टी गवर्नर बनीं: DU और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड से पढ़ाई की, वर्ल्ड बैंक-IMF में काम किया; जानें कंप्लीट प्रोफाइल


4 घंटे पहले

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भारत सरकार ने बुधवार, 2 अप्रैल को डॉ. पूनम गुप्ता को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। वे प्रधानमंत्री की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल की सदस्य हैं। डॉ. पूनम का कार्यकाल 3 साल का होगा।

डॉ. पूनम जनवरी में इस्तीफा दे चुके डिप्टी गवर्नर माइकल पात्र की जगह लेंगी। कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने पूनम के अपॉइंटमेंट को अप्रूवल दिया है। 5 अप्रैल को RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक से पहले ये नियुक्ति की गई है।

पूनम अभी NCAER ( नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च) की डायरेक्टर जनरल और 16वें वित्त आयोग की सदस्य भी हैं। इससे पहले वे NITI आयोग की डेवलपमेंट एडवाइजरी कमेटी और FICCI की एक्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य रह चुकी हैं।

डॉ. पूनम ने साल 1998 में इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में PhD के लिए एक्जिम बैंक पुरस्कार जीता।

IMF से करियर की शुरुआत की

डॉ. पूनम ने साल 1998 में अपने करियर की शुरुआत इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड यानी IMF से की। उन्होंने IMF में लगभग 8 साल (1998 से 2006 तक) काम किया। इस दौरान वे यूरोपियन डिपार्टमेंट, रिजर्व डिपार्टमेंट और अफ्रीकन डिपार्टमेंट में शामिल रहीं। इन डिपार्टमेंट्स में उन्होंने इकोनॉमिस्ट और पॉलिसी एनालिस्ट के रूप में काम किया।

DU में फैकल्टी रह चुकी हैं

इसके बाद वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (दिल्ली यूनिवर्सिटी में) एसोसिएट प्रोफेसर रहीं। उन्होंने DSE के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स में 2 साल (2006 से 2008) तक पढ़ाया।

ICRIER में मैक्रोइकोनॉमिक्स पढ़ाया

डॉ. पूनम ने 2 साल (2009 से 2011) तक इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन (ICRIER) में मैक्रोइकोनॉमिक्स की प्रोफेसर के रूप में काम किया है। ICRIER भारत का एक प्रमुख इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट है, जिसकी स्थापना 1981 में एक नॉन-प्रॉफिट, इंडिपेंडेंट थिंक टैंक के रूप में की गई थी।

पूनम ने अमेरिका में ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन और सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट जैसे थिंक टैंक्स में विजिटिंग फैकल्टी और सलाहकार के रूप में काम किया। यहां उन्होंने रिसर्च पेपर्स पब्लिश किए और नीति चर्चाओं में भाग लिया।

पूनम ने अमेरिका में ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन और सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट जैसे थिंक टैंक्स में विजिटिंग फैकल्टी और सलाहकार के रूप में काम किया। यहां उन्होंने रिसर्च पेपर्स पब्लिश किए और नीति चर्चाओं में भाग लिया।

NIPFP में RBI चेयर प्रोफेसर भी रही हैं

डॉ. गुप्ता नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) में RBI चेयर प्रोफेसर रह चुकी हैं। उन्होंने 2 साल (2011 से 2013) तक काम किया। NIPFP भारत का एक प्रमुख रिसर्च इंस्टीट्यूट है, जो पब्लिक इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसीज पर फोकस्ड है। इसे 1976 में एक ऑटोनॉमस सोसाइटी के रूप में नई दिल्ली में स्थापित किया गया था।

वर्ल्ड बैंक में 8 से ज्यादा सालों तक काम किया

डॉ. गुप्ता ने वर्ल्ड बैंक में 8 से ज्यादा सालों तक पहले सीनियर और बाद में लीड इकोनॉमिस्ट के रूप में काम किया। उन्होंने साल 2013 में सीनियर इकोनॉमिस्ट के रूप में वर्ल्ड बैंक जॉइन किया। फिर साल 2017 में वर्ल्ड बैंक में लीड इकोनॉमिस्ट ऑफ इंडिया बनीं।

वर्ल्ड बैंक में रहते हुए उन्होंने साल 2020 से 2021 के दौरान इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) के ग्लोबल मैक्रो एंड मार्केट रिसर्च में लीड इकोनॉमिस्ट के रूप में काम किया।

16वें वित्त आयोग के एडवाइजरी काउंसिल का सदस्य हैं

डॉ. गुप्ता को साल 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल का सदस्य बनाया गया। वे अभी भी पार्ट टाइम में इस पद पर कार्यरत हैं। सदस्य के रूप में वे देश की इकोनॉमिक पॉलिसीज पर सलाह देती हैं।

इसके बाद, डॉ. पूनम गुप्ता को साल 2024 में 16वें वित्त आयोग की एडवाइजरी काउंसिल का सदस्य नियुक्त किया गया। वे इकोनॉमिक पॉलिसी, फिस्कल सिस्टम और फाइनेंशियल रिफॉर्म्स से जुड़े मुद्दों पर कमीशन को परामर्श देती हैं।

डॉ. पूनम गुप्ता 'इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन (ICRIER)' की पहली महिला डायरेक्टर जनरल हैं।

डॉ. पूनम गुप्ता ‘इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन (ICRIER)’ की पहली महिला डायरेक्टर जनरल हैं।

ICRIER की महानिदेशक बनने वाली पहली महिला

डॉ. पूनम गुप्ता साल 2021 में इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन (ICRIER) की डायरेक्टर जनरल यानी महानिदेशक बनीं। वे इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला हैं। ICRIER एक प्रीमियर इकोनॉमिक थिंक टैंक है, जो पॉलिसी मेकिंग, ट्रेड, फाइनेंस और मैक्रोइकोनॉमिक्स जैसे टॉपिक्स पर रिसर्च करती है।

RBI में 4 डिप्टी गवर्नर होते हैं

RBI में कुल 4 डिप्टी गवर्नर होते हैं। इनमें से दो भारतीय रिजर्व बैंक के ऑफिशियल्स होते हैं, एक मॉनिटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट की देखरेख करने वाला इकोनॉमिस्ट होता है और चौथा कॉमर्शियल बैंकिंग सेक्टर से आता है। गुप्ता की नियुक्ति से पहले ये पद 2 महीने तक खाली था।

डॉ. पूनम की नियुक्ति के साथ RBI में अब स्वामीनाथन जे., टी. रबी शंकर और एम. राजेश्वर राव सहित कुल चार डिप्टी गवर्नर हैं।

पीएम से ज्यादा सैलरी मिलेगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 1.66 लाख रुपए प्रतिमाह सैलरी मिलती है, जिसमें उनकी बेसिक पे 50,000 रुपए, संसदीय भत्ता 45,000 रुपए, व्यय भत्ता 3,000 रुपए और दैनिक भत्ता 2,000 रुपए शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें अन्य भत्ते भी मिलते हैं।

वहीं, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर को 2.25 लाख रुपए की मासिक सैलरी मिलती है, जो प्रधानमंत्री की सैलरी से अधिक है। इसके अलावा उन्हें कई अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। 2022 में एक RTI के जवाब में आरबीआई ने ये जानकारी दी थी।

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